(बाल कविता)
हरदम काम, हरदम काम
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हरदम काम, हरदम काम ।
मम्मी करतीं हरदम काम।।
सुबह-सुबह उठ जातीं रोज़
झाड़ू शीघ्र लगातीं रोज़
चाय-नाश्ता सबको देतीं
मदद किसी से भी न लेतीं
अपना ध्यान कभी न रखतीं
सबकी इच्छा पूरी करतीं
हाथ पैर सब चलते रहते
बिल्कुल लेते नहीं विराम।
हरदम काम, हरदम काम ।।
बिस्तर ठीक सभी का करतीं
जूठे बर्तन धुल कर रखतीं
रगड़-रगड़ कर कपड़े धोतीं
देर रात में हर दिन सोतीं
रोज़ निरन्तर खटने वाली
घर की चिंता करने वाली
सबसे पहले पूजा करके
शिव शंकर का लेतीं नाम ।
हरदम काम, हरदम काम ।।
नए-नए कपड़े दिलवातीं
राशन पानी लेने जातीं
क्यारी में पौधे लगवातीं
हरा-भरा माहौल बनातीं
सुख के फूल सभी को देतीं
दुख के कांटें खुद हर लेतीं
सबकी सेवा करते-करते
सुबह से हो जाती है शाम।
हरदम काम, हरदम काम ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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