एटम बम रखे होते यदि सोचो तब जापानी।
अमरीका का घोर भयावह न होती मनमानी।।
परमाणु बम से मानवता पर खेल नहीं खेला होता।
नागासाकी हिरोशिमा भी दर्द नहीं झेला होता।।
सवा शेर को देख शेर मर्यादा सीखा करता है।
भीष्म द्रोण कृप छाँव तले मर्यादा चींखा करता है।।
सदा असुर की शक्ति रौंदती मानवता को कुचला है।
ब्यर्थ भेड़िये से पसारना दया आश का अँचला है।।
एटम बम का भस्मासुर दुनिया को आँख दिखाता।
ऐसी भू अस कई पृथ्वि को सक्षम नष्ट बताता।।
परमाणु युक्त जो शेर खड़े क्या पृथ्वी एक बनाई।
नागासाकी हिरोशिमा की क्या देखी भरपाई।।
सजी धजी दुल्हन सी धरती अर्पित रत्न खदान भरी।
भाँति भाँति से दोहित मानव नूतन नित्य उड़ान भरी।।
पाल पोश कर किया अलंकृत जिसे बनावति राजा।
वही ताक अस्तित्व मिटाने तनिक न आवति लाजा।।
नवों ग्रहों की रचना जिसनें एक साथ कर डाली।
नभ मण्डल भूमण्डल में जो प्राणवायु भर डाली।।
क्षण में राजा रंक बना कब उस विराट को देखो।
अहंकार को त्याग समझ सुन तुझ सम भरे अनेकों।।
धरती माँ के घाव भरें वह मरहम जख्म लगाओ।
एकोब्रह्म की स्वयं सिद्धता मन से दूर भगाओ।।
मानव में हो देव समाहित राक्षस भाव मिटाओ।
चलते वक्त में जगत रो पड़े ऐसे कर्म बनाओ।।
महागरल का पान शम्भु करि समुझा जगत हितार्थ।
सकल अंग का दान तोलि नृप शिबि भी हुए कृतार्थ।।
जगत हित्त लगि ऋषि दधीचि नें जीवित अस्थि लुटाये।
जिनसे बनें अमोघ अस्त्र भू निशिचर हीन कराये।।
सारे निशिचर मरे भूमि हित बिबस हुए अवतारी।
कभी शस्त्र संधान राम शिव आते जहाँ मुरारी।।
रावण हाल देखना हो तो लाँघो लक्षिमन रेखा।
तय है जानों उस कुकर्म का होगा निश्चित लेखा।।
गैवीनाथ मिश्र शाहपुर रीवा
9200981625


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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