तुम्हें वह पसंद नहीं
क्योंकि वह तुम्हारी
तरह दिखता है।
वह उसी भाषा में बात
करता है,
जो तुम्हें पता है,
उसके कपड़े,
उतने ही साधारण
जितने तुम्हारे।
तुम्हें वह पसंद नहीं
क्योंकि वह बैठ
जाता है, तुम्हारे बीच।
तुम्हें वह पसंद है
जो तुमसे बड़ा हो,
जिससे मिलना तुम्हें
एक सपना लगे,
जिससे मिलने में उम्र लगे,
जिसका सीना चौड़ा हो,
जो ऊँचे सपने दिखाए,
जो बड़ी-बड़ी बातें गढ़े।
तुम्हें वह पसंद नहीं
क्योंकि उसमें वैसा कुछ नहीं।
वह जो भी बोलता है
उसका अर्थ तुम्हारे
पास आते-आते बदल
दिया जाता है,
क्योंकि एक डर है कि
वह कहीं फिर अर्धनंगा
फ़क़ीर होकर किसी
लंबी यात्रा पर न निकले।
तुम्हें वह पसंद नहीं
क्योंकि तुम्हारी आँखें
चकाचौंध की आदी हैं।
क्रांति का अंकुर ऐसे ही
आदमी के हृदय से फूटता है
जिसके पास कुछ नहीं,
बस एक आवाज़ हो और एक सच हो।
मगर तुम्हें पता नहीं,
तुम्हें वह पसंद नहीं।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







