👉बह्र - बहर-ए-हज़ज मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़
👉 वज़्न - 221/1221/1221/122
👉 अरकान - मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन
आसान हुआ जाता सफ़र देख रहा हूँ
मैं रब की इनायत का असर देख रहा हूँ
ये रात गमों की भी गुज़र जाएगी जल्दी
उम्मीद की मैं आती सहर देख रहा हूँ
रहते थे सभी लोग जहाँ अम्न से मिलकर
उस शहर में जलते हुए घर देख रहा हूँ
रिश्तों में सभी लोग नफ़ा ढूँढते है अब
चालाक हुआ कितना बशर देख रहा हूँ
वो छाए हैं कुछ ऐसे मिरे दिल की जमीं पे
हर-सू ही दिखे वो मैं जिधर देख रहा हूँ
गुज़रे कभी जिस राह मुहब्बत के मुसाफ़िर
नफ़रत के वहाँ आज शरर देख रहा हूँ
देते हैं सभी शक़्ल यहाँ झूठ को सच की
मैं आज सभी में ये हुनर देख रहा हूँ
ऐ "शाद" बला-ख़ेज़ है दरिया-ए-मुहब्बत
मैं इश्क़ में हर आँख को तर देख रहा हूँ


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







