मुहब्बत में इबादत में शहादत में विरासत में
बेचारा गुल ही शहीद होता है हरेक हालत में
आजकल दिल ने एक अजीब शौक पाला है
ये चाहता है रहना किसी दिल की हिरासत में
रंग गिरगिट की तरहा ये बदल नहीं सकते तो
भला क्या गुल खिलाएंगे जाकर सियासत में
जो समझना हो खुदसे समझ लीजिये जनाब
है राज कोई छुपा हरेक आदमी की इनायत में
दास कायदा ए कुदरत समझ आएगा आखिर
हमको सतानेवाले पायेंगे खुदसे दर्द विरासत में. .


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







