मैं हूँ एक नन्हा कुत्ता ,
जब भी निकलता रोटी खाने को ,
मिल जाती मुझको दो - तीन लाठी ,
प्यास के कारण दर - दर कहीं भटकता हूँ ,
फिर कहीं से पी आता मैं नाली का पानी ,
सर्दी हो या गर्मी हो ,
हो चाहें बरसात ,
पूरा समय निकाल देता मैं सड़क के उस पार ,
अपना दर्द किसे सुनाऊं ,
क्योंकि मैं एक बेजुबान हूँ ,
जिसकी ना कोई सुनता है ,
ना कोई करता मेरी मदद ,
क्योंकि मैं एक बेजुबान हूँ ,
यदि कहीं शान्त बैठूं तो भी मिलती मुझको लात ,
यदि मैं करू कोई आवाज़ तो भी मिलती मुझको ,
अपना दर्द छुपाकर मैं दर - दर कहीं भटकता हूँ ,
क्योंकि मैं एक बेजुबान हूँ ,
मैं हूँ एक नन्हा कुत्ता ,
मैं हूँ एक नन्हा कुत्ता ॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







