खुशी से जीना है, बगैर अंदाज-ए-उम्र हमें..
आसमां से मिली है, परवाज–ए–उम्र हमें..।
ये कहां आ गए हैं हम, इस अनजान शहर में..
आशियां से दूर करना हैं, आगाज़-ए-उम्र हमें..।
मुझे तो उनसे कोई, ख़िताब की दरकार नहीं..
खुदा की दी हुई मिली है, मिजाज़-ए-उम्र हमें..।
कि उनकी नाखुशी की वजह, कुछ भी न थी..
मिज़ाजपुर्सी का न जाना, रिवाज़-ए-उम्र हमें..।
ज़माने के सब दांव जान गए थे "क्षितिज" हम..
मगर कभी छोड़ न पाए, लिहाज ए–उम्र हमें..।
-पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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