हवा के साथ तिनका चला जाता है उड़कर
कहाँ अपना पराया देखता है पीछे मुड़कर
आँधियो में गिरते हैं तनके खड़े हुए जो पेड़
नन्हा सा पौधा बच जाता है सिर्फ झुककर
हमेशा होती है खातिर घर में लाडले बेटे की
पर लाडली की पूछेगा मरजी कौन खुलकर
एक सूरज की तरह बस जलता रहूँगा बेबस
लोग जल अर्पित करेंगे महज लोटा भरकर
वक्त कुछ थम सा गया है दास देखो आइना
गम से लड़ना शायरी है रुकना नहीं है डरकर. .


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







