जब से हमने जीना,मौज में रहना शुरू किया है
लोगों ने हम पर,अरे !हम पर , मरना शुरू किया है।
इतना असर हो रहा है, फूलों के महकने का,
साथ रहकर , कांटों ने, महकना शुरू किया है।
धड़कनों की तरंगें जब से,लय में आने लगी है,
पलकों पर बूंद खुशी का, अब ठहरने लगा है।
कोई गीत लगन की,मौन है,पर अंतस में गूंजती है,
उसकी तरंगें, शागिर्दों से, गुजरना शुरू किया है।
नफरत किया तब, थकावट ने दिल खूब मरोड़ा,
प्रीत के रंग चढ़े,आलस ने दूर रहना शुरू किया है।
सूरज, चांद, सितारों को,जब बंद आंखों से देखा,
जिंदगी को तब से एहसास करना शुरू किया है।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







