इश्क के बादल छाए मगर बारिश ना हुई
दिल की मिट्टी तो महकी मगर बारिश ना हुई
तेरा जिक्र हवा में था तेरी खुशबू भी कहीं
फूल शाखों पे मुस्काए मगर बारिश ना हुई
तेरे आने की खबर गाँव में फैली ऐसे
सबने दरवाजे तो खोले मगर बारिश ना हुई
रोज खिड़की पे तेरे नाम का मौसम ठहरा
रोज उम्मीद जगाई मगर बारिश ना हुई
एक छाता लिए हम भी खड़े थे कब से
राह बादल की ही ताकी मगर बारिश ना हुई
वो कई रोज मेरे छत पे ठहरी भी बहुत
आंख भर आई घटा मगर बारिश ना हुई
वो मेरे पास तो बैठा था कई शाम तलक
बात होठों तक आई मगर बारिश ना हुई
उसने हर बात में मिलने का इशारा तो किया
वक्त की धूप थी ऐसी मगर बारिश ना हुई
उम्र भर भीगने की चाह लिए बैठे रहे
इश्क देता रहा सौगात मगर बारिश ना हुई
एक मुद्दत से खड़ा हूं मैं किसी जमीन की तरह
जिस पे सावन तो कई आए मगर बारिश ना हुई


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







