दो घड़ी महबूब की क़ुर्बत साँसों में राहत होती हैं
ये मुहब्बत है, महबूब की इबादत आदत होती हैं
अना रखो तों मक़ाम-ए-इश्क़ में कदम न रखना
महबूब के कदमों में सिर रखना इबादत होती हैं
महबूब के नक़्श-ए-पा ढूंढता फिरता हैं दर-बदर
फिर तलाश-ए-बिस्मिल उसकी किस्मत होती हैं
चश्म-ए-कौसर वो ज़ेवर हैं जो साँसों क़ो बांध दे
वो अग़र निगाह उठा ले दिल में कयामत होती हैं
शान-ओ-शौक़त कुछ भी नहीं मुहब्बत में जानाँ
महबूब के पाऊँ की धूल इसकी जरूरत होती हैं
कृष्णा की मुहब्बत में ज़फा की कोई जगह नहीं
ज़रा बे-नियाज़ी जिंदगी भर की खिलावत होती हैं
-कृष्णा शर्मा
ज़फा = बेवफाई, बे -नियाज़ी = ignore, खिलावत = तन्हाई
तलाश-ए-बिस्मिल = किसी चीज़ क़ो पागलो की तरह ढूंढने वाला शख्श
चश्म-ए-कौसर = महबूब की पवित्र आँखे,
नक़्श-ए-पा = कदमों के निशान


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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