"किसी की मौत के दिन,
जो लोग आंसू बहाते हैं,
वो उसे ही याद करते हैं,
या इसी बहाने उसकी याद को भी,
वहीं निकाल के छोड़ आते हैं,
मौत से कोई डरता कहां है,
बस उसके पहले,
जिंदगी बर्बाद होती हैं,
जिसे चाहते हो,
उसे पाना मत,
और जिसे पा चुके हो ,
उसे खोना मत,
इतना खास ना होना जिंदगी का,
कि हाल वाकिया भी,
जिंदगी का मज़ाक लगे,
इतना बिगाड़कर क्या बेहतरीन होगा,
बंद पिंजरे में जिंदगी का तमाशा कोई और देखता है।"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







