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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

रौनक गजब की है

रौनक गजब की है

छाया है जब से कोहरा इस शहर में रौनक गजब की है

क्या हुआ मत पूछो हमसे आज यहां सर्दी गजब की है

हमको लग रहा है हर तरफ आज ये मौसम धुआं धुआं

जानने की मत करो कोशिश ये हवा किस सबब की है

कभी हवा में कभी पानी में यह जहर कहां से घुलता है

ना पूछो ये मौत कहां से आई ये कजां भी गजब की है

हर शाख पे ये बैठे उललू आज भी देख कर मौन क्यूं हैं

झूठ को नकार देने की उन की ये अदा भी गजब की है

तर-बतर हो रही हैं आज सङकें, क्यूं अपनों के लहू से

इन हादसों में शव गिनने की, ये कला भी गजब की है

यूं झाङ लेते हैं वो पल्ला हर एक जिम्मेदारी से अपना

जिस शान से बोलते हैं झूठ, ये अदा भी गजब की है

इस शहर में हर कोई जिस फिजां से, यूं रहता है परेशां

हम जिस हाल में जी रहे हैं, ये फिजां भी गजब की है

रोज नाटक नया करके खेलते हैं वो हमारी ही जान से

लूटने के नए बहानों की ये अदा भी गजब की है

खून करते हैं न जाने कितना, हर रोज हमारे भरोसे का

यादव से समझ लो तुम ये नादानी तो हम सब की है


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (3)

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मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

सर जी आपकी रचना ही गजब की है। एक दर्द है,कसक है, और शिकायत है आज की राजनीति से। खूबसूरत रचना 👌👌🙏🙏🙏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं आभार समदिल भाई, आपको सादर नमस्कार।

श्रेयसी said

क्या गज़ब कहा आपने लाज़वाब रचना,सादर प्रणाम लेखराम भैया 🙏🙏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं स्वागत, आपको सादर नमस्कार।

कृष्णा शर्मा said

👏👏
आपकी ग़ज़ल गज़ब की हैं

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं स्वागत मैम,आपको सादर नमस्कार।

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