कोयल, बुलबुल,मोर, पपिहा,
जब जब अपनी टेर सुनाए,
क्यूं लगता है,तुम गाती हो,
बात हमारी समझ न आए।
कलकल छलछल धार जब
पत्थर पत्थर टकराए,
क्यूं ये मन को खींचे जाए,
किससे पूछें, कौन बताए?
चंदा,तारे,आसमान से,
छत पर हमको रोज बुलाए,
बिगड़ रही है दिल की हालत
कैसे सम्हले , कौन सीखाए।
पहले कभी तो, हुआ न ऐसा,
तन झूले, मन गीत गाए,
फूल फूल पर भौंरे गाएं,
देख देख मन बहके जाए।
अब तो अकेले रहे नहीं हम,
स्वयं हंसें, स्वयं बतियाएं,
शायद हमको प्रीत हुआ है,
सखा हमारे, छेड़े जाए।
फंस गए हैं, प्रेम जाल में
चाहें तो भी छुड़ा न पाएं,
परंतु,ये सब, कैसे हुआ,
लाख जतन कर समझ न पाए।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







