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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

उम्मीदों की मशाल

आज हर ओर अँधेरा छाया है,
हमें मशाल लेकर चलना है।

हर उस बुझते दीपक को,
अपनी लौ से फिर जलाना है।

जो निराशा का दामन थामे हैं,
जो ऊँचाइयों को छूने से डरते हैं,
जो हार को अपनी किस्मत मान बैठे हैं—

हमें उन्हें रास्ता दिखाना है,
उन्हें उड़ना सिखाना है,
उन्हें जीत का सही अर्थ समझाना है।

हमें उम्मीदों की मशाल लेकर चलना है,
हर अँधेरे को उजाले में बदलना है।
वन्दना सूद


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

+

कृष्णा शर्मा said

👏👏👏👏
बहुत खूबसूरत

वन्दना सूद replied

🙏🙏

Vadigi.aruna said

आप के हर शब्दों में ओज है, बहुत खूब👌👌

वन्दना सूद replied

🙏🙏

Lekhram Yadav said

वाह क्या खूबसूरत जागृति अभियान छेङा है आपने, हमें भी साथ ले लेना, बहुत खूबसूरत रचना आपको सादर नमस्कार वन्दना जी।

वन्दना सूद replied

sir हम आपके पीछे हैं आपके experience से ही हम कामयाब हैं

रीना कुमारी प्रजापत said

बहुत बढ़िया

वन्दना सूद replied

🙏🙏

इक़बाल सिंह “राशा“ said

वन्दना जी
आपकी कविता बहुत ही प्रेरणादायक और ऊर्जा से भर देने वाली रचना।
आपकी पंक्तियाँ न केवल अँधेरे को चुनौती देती हैं, बल्कि भीतर एक नई रोशनी भी जगा देती हैं सच में, यह कविता आशा की मशाल बनकर दिलों को प्रकाशित करती है। बहुत बढ़िया
आपको सादर प्रणाम

वन्दना सूद replied

शुक्रिया sir 🙏🙏😊

साक्षी लोधी said

कोई ये बता सकता है की पिछले वर्ष
Hashtag jindgi नामक पुस्तक छपने बालि थी जिसके पैसे भी ले लिए गए १०००
रुपए अभी तक कुछ अता पता नही हे
मेरे विचार से
उन महाशय को पैसे वापिस कर देने चाहिए
मेने मेल किया कोई जवाब नही आया

वन्दना सूद replied

साक्षी जी
मैं उसमें सहलेखक थी।मेरा किसी भी तरह के financial matter से कोई संबंध नहीं था । मेरे भी 4000 रुपए लगे हुए थे और भी लोगों के पैसे लगे थे ।you are not the only one who was connected with this book so please be calm.please send your upi or mobile number details on my email or WhatsApp number i’ll pay you and last thing Ashok ji ki major illness ki wajah se woh ab humare beech nahi hain isliye book publish hone ki koi possibility nahi hai
Email id connect.vidhisood@gmail.com

उपदेश कुमार शाक्यावार said

बहुत सुन्दर रचना..आपको सादर नमस्कार

वन्दना सूद replied

🙏🙏

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