वो ज़ब भी मिलता हैं कोई न कोई सवाल छोड़ जाता हैं
रूहानी हाज़िरी लगाता हैं वो और कमाल छोड़ जाता हैं
माना उसके काबिल नहीं माना वो हासिल नहीं फिर भी
क्यूँ वो मुस्कुराकर रोज़ ग़दला सा रुमाल छोड़ जाता हैं
हर दफ़ा वही वो मसहूर-कुन और हर दफ़ा हम घायल
सादे लिबास में आता हैं इश्क़ पऱ अमाल छोड़ जाता हैं
रज़ा-ए-महबूब सर आँखों पे हम दर्द-ए-इश्क़ पर राज़ी
ईसार-ए-इश्क़ में भी वो जिंदगी में जमाल छोड़ जाता हैं
नाज़-ओ-अदा महबूब की वो हमें अपनाये न अपनाये
बेगाने जहाँन में वो हमकों बेबस-बेहाल छोड़ जाता हैं
महबूब के कदम न पड़े कभी मेरे मिट्टी के इस मक़ा पऱ
ख़ुदा मेरे इस जन्म का सबसे बड़ा मलाल छोड़ जाता हैं
दो लम्हें महबूब की कुर्बत के,जहाँ की बादशाही फ़िकी
वो जाता हैं तों कृष्णा हमें फिर सें कंगाल छोड़ जाता हैं ..
-कृष्णा शर्मा
मशहूर-कुन = करामाती, ईसार-ए-इश्क़ = प्रेम में त्याग,
अमाल = कार्य, दर्द-ए-इश्क़ = प्रेम की पीड़ा, कुर्बत = समीपता
रज़ा-ए-महबूब = प्रेमी की इच्छा,नाज़-ओ-अदा = नखरे और अंदाज


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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